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जगद्गुरु कृपालु जी महाराज: आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति के प्रेरणास्रोत

  कृपालु महाराज के भजन और प्रवचन कृपालु महाराज के भजन प्रेम, भक्ति और भगवान की कृपा से ओतप्रोत होते हैं। उनके द्वारा रचित भक्ति संगीत और कीर्तन श्रोताओं को ईश्वर के प्रेम में डुबा देते हैं। उन्होंने अपने प्रवचनों में भक्ति को सरलतम रूप में प्रस्तुत किया, जिससे हर व्यक्ति उसे अपने जीवन में आत्मसात कर सके। कृपालु महाराज के प्रवचन वेद, उपनिषद, गीता और रामायण के सार को सरल भाषा में समझाने का अनूठा प्रयास करते हैं।उनके प्रवचनों का मुख्य संदेश यह था कि भक्ति शरीर और इन्द्रियों नहीं बल्कि मन से की जाने वाली साधना है, जिसमें मनुष्य पूर्ण समर्पण और प्रेम के साथ ईश्वर की आराधना करता है।इसके लिए उन्होंने रूपध्यान साधना का उपदेश दिया। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज जब प्रवचन देते थे तो लाखों श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। आगे पढ़े

प्रेम मंदिर की यात्रा – एक 12 साल के बच्चे की नजर से(जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज)

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  ठंडी की छुट्टियाँ शुरू होते ही मैं बहुत खुश था। अब पूरे दो हफ़्तों के लिए ना स्कूल जाना था, ना होमवर्क करना था। मुझे लगा पापा हमको इस बार पहाड़ों पर बर्फबारी दिखाने लेकर जाएंगे, लेकिन जब पापा ने बताया कि हम वृंदावन के प्रेम मंदिर जा रहे हैं, तो मेरी एक्साइटमेंट थोड़ी कम हो गई। मुझे लगा मंदिर में तो बस पूजा-पाठ होता है, मैं वहां जाकर क्या करूंगा! मैंने जब इसके बारे में मम्मी से बोला तो उन्होनें यह कहकर टाल दिया, "एक बार चलो तो, फिर देखना!" हम सुबह तैयार होकर दिल्ली से अपनी कार से ही वृन्दावन के लिए निकले। पापा कार चला रहे थे, मम्मी और मेरी बहन पीछे वाली सीट पर थी, और मैं आगे पापा के बगल में बैठ गया। रास्ते में मैं खिड़की से बाहर देखता रहा और सोचता रहा कि पता नहीं ये ट्रिप कैसी होने वाली है। पापा रास्ते में बता रहे थे कि प्रेम मंदिर  जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज   ने बनवाया है और यह राधा-कृष्ण जी और सीता-राम जी का मंदिर है। लेकिन मैं बस सिर हिला रहा था और मन ही मन सोच रहा था कि काश हम कहीं स्नोफॉल वाली जगह पर जाते। आगे पढ़े

रूपध्यान: जानें मेडिटेशन का सबसे असरदार तरीका (जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज )

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  मेडिटेशन के इन सभी तरीकों का लक्ष्य एक ही है कि किस प्रकार मन-बुद्धि को एकाग्र किया जाये। कुछ लोग ध्यान के माध्यम से मन के विचार रोकने का भी प्रयास करते हैं पर इसका सफल होना बहुत कठिन है। उदाहरण के तौर पर, यदि आप साइकिल चला रहे हैं, और आप चाहें कि पैडल चलाये बिना ही साइकिल का संतुलन बना रहे तो यह साधारणतया असंभव ही कहा जायेगा। पर अगर आप उसी चलती साइकिल को हाथ से दिशा दे दें, तो आप चाहे उसे दाएँ मोड़ दें या बाएँ। इसी प्रकार मन के विचार पूरी तरह रोक देना इतना कठिन है कि उसे असंभव ही कहा जा सकता है। इसके बजाय यदि हम अपने मन की दिशा भगवान या अन्य सकारात्मक चीज़ों की तरफ मोड़ दें, तो मन तनाव से छुटकारा पाकर शांति और आनंद का अनुभव तो करेगा ही, साथ ही हमारा आध्यात्मिक लाभ भी हो जायेगा।   आगे पढ़े

प्रेम रस सिद्धांत की 70वीं वर्षगांठ पर जानें पुस्तक की खास बातें(जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज)

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  कृपालु भक्तियोग-तत्वदर्शन साल 2025 में प्रेम रस सिद्धांत की 70वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह पुस्तक देश-विदेश के लाखों लोगों की आध्यात्मिक शंकाओं का समाधान कर उन्हें ईश्वरीय मार्ग पर अग्रसर कर चुकी है। पिछली कई सदियों के इतिहास में ऐसी पुस्तक कम ही पढ़ने में आती है जो आम व्यक्ति की भाषा में, जटिल आध्यात्मिक विषयों की इतने बोधगम्य रूप से विवेचना कर दे। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज इस विश्व के पांचवें मूल जगद्गुरु हैं। 34 वर्ष की अल्पायु में उन्हें भारत के 500 महानतम विद्वानों की सर्वमान्य सभा काशी विद्वत् परिषद् द्वारा 1957 में जगद्गुरु की उपाधि प्रदान की गई थी। उनके पूर्व इस युग के चारों जगद्‌गुरुओं ने भी अपने सिद्धांतों को लिपिबद्ध किया लेकिन सबने इसके लिए संस्कृत भाषा का चुनाव किया। वहीं जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने अपना संपूर्ण भक्तियोग-तत्वदर्शन सरल हिंदी में ही लिखा जिससे समाज का हर वर्ग उसे आसानी से समझ सके और लाभ ले सके।  आगे पढ़े

Jagadguru Kripalu Ji Maharaj: World's Fifth Jagadguru Who Elevated Humanity.

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  From the sacred Vedas to the revered Ramayana, all scriptures unequivocally declare that no entity is greater than a true Guru. A genuine Guru, having realized God, dispels ignorance, liberates souls from suffering, and bestows eternal bliss by uniting them with God. This leads to an intriguing question: if nothing surpasses the Guru, how did the term Jagadguru come into being? The word Jagadguru originates from the scriptures and is reserved for the Divine, as encapsulated in the verse: Krishnam vande Jagadgurum -- "I bow to Krishna, the Guru of the universe." Shankaracharya, The Adi Jagadguru The revered tradition of Jagadgurus began with Adi Shankaracharya. At the time, society was engulfed by misconceptions and fallacies, creating widespread confusion about the scriptures and Vedas. Recognizing this spiritual crisis, the era's preeminent scholars resolved to designate a divine personality -- someone who had mastered all the scriptures and Vedic knowledge -- as Jagad...

रूपध्यान: जानें मेडिटेशन का सबसे असरदार तरीका(श्री कृपालु जी महाराज)

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  वेदों-शास्त्रों में बताया गया रूप ध्यान का यह तरीका जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने आसान भाषा में समझाया है।  इस आपाधापी भरी दुनिया में अधिकांश लोग तनाव से जूझ रहे हैं। किसी को परिवार की टेंशन है तो किसी को नौकरी की। अगर ये तनाव अधिक बढ़ जाये तो ये डिप्रेशन या अवसाद का रूप ले सकता है। इस तनाव रूपी महामारी से बचने का सबसे अच्छा उपाय है मेडिटेशन। यही वजह है कि ध्यान या मेडिटेशन अब एक बहुत चर्चित शब्द बन चुका है। आजकल हमें ध्यान के कई प्रकार पढ़ने-सुनने में आते हैं जैसे माइंडफुलनेस मेडिटेशन, केंद्रित ध्यान, मंत्र ध्यान, विज़ुअलाइज़ेशन मेडिटेशन, गतिशील ध्यान, प्रोग्रेसिव रिलैक्सेशन आदि।  आगे पढ़े

कृपालु जी महाराज की पुत्रियां और सामाजिक कार्य

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कृपालु  जी महाराज की तीनों पुत्रियां सुश्री डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी, सुश्री डॉ. श्यामा त्रिपाठी जी और सुश्री डॉ. कृष्णा त्रिपाठी जी अपने पिता के दिखाए गए मार्ग पर चल रही हैं। उनके द्वारा जगद्गुरु कृपालु परिषत् के माध्यम से समाज में निःशुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कृपालु महाराज ने कई शैक्षिक संस्थानों और अस्पतालों की स्थापना की, जहां गरीबों और जरूरतमंदों को निःशुल्क सेवाएं प्रदान की जाती हैं। आज भी कृपालु महाराज समाचार में सुर्खियों में रहते हैं, क्योंकि उनके द्वारा स्थापित संस्थाएं, मंदिर और आश्रम लाखों भक्तों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। उनका संदेश केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने सामाजिक सेवा और मानवता की भलाई के लिए भी कार्य किए। उनके द्वारा रचित ग्रंथ और प्रवचन आज भी भक्तों को मार्गदर्शन देने का कार्य कर रहे हैं।   आगे पढ़े