प्रेम रस सिद्धांत की 70वीं वर्षगांठ पर जानें पुस्तक की खास बातें(जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज)

 


कृपालु भक्तियोग-तत्वदर्शन

साल 2025 में प्रेम रस सिद्धांत की 70वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह पुस्तक देश-विदेश के लाखों लोगों की आध्यात्मिक शंकाओं का समाधान कर उन्हें ईश्वरीय मार्ग पर अग्रसर कर चुकी है। पिछली कई सदियों के इतिहास में ऐसी पुस्तक कम ही पढ़ने में आती है जो आम व्यक्ति की भाषा में, जटिल आध्यात्मिक विषयों की इतने बोधगम्य रूप से विवेचना कर दे।

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज इस विश्व के पांचवें मूल जगद्गुरु हैं। 34 वर्ष की अल्पायु में उन्हें भारत के 500 महानतम विद्वानों की सर्वमान्य सभा काशी विद्वत् परिषद् द्वारा 1957 में जगद्गुरु की उपाधि प्रदान की गई थी। उनके पूर्व इस युग के चारों जगद्‌गुरुओं ने भी अपने सिद्धांतों को लिपिबद्ध किया लेकिन सबने इसके लिए संस्कृत भाषा का चुनाव किया। वहीं जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने अपना संपूर्ण भक्तियोग-तत्वदर्शन सरल हिंदी में ही लिखा जिससे समाज का हर वर्ग उसे आसानी से समझ सके और लाभ ले सके। आगे पढ़े

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