जगद्गुरु कृपालु परिषत द्वारा एक मासूम को मिला जीवन का उपहार

kripalu maharaj
प्रायः अनेक जलते हुये दिये एक प्रकाशित दिये से अधिक आकर्षक लगते हैं, पर एक दिया हज़ारों दियों को प्रकाशित कर सकता है। अतः एक दिये को जलाकर हम अनेक दियों को प्रकाशित कर सकते हैं। ठीक इसी प्रकार एक जीवन से अनेक जीवन प्रकाशित होते हैं। यदि एक जीवन को बचा लिया जाये तो उससे अनेक व्यक्तियों के जीवन में आशा का प्रकाश फैलाया जा सकता है।

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा स्थापित संस्था जगद्गुरु कृपालु परिषत् के संचालन में चल रहे वृन्दावन स्थित जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय ने ऐसे ही एक जीवन को असमय मृत्यु से बचाकर संसार के समक्ष मानवता का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया है।


गोविंद जाटव जो वृन्दावन से मात्र 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम माट के निवासी द्वारका प्रसाद जाटव की एकमात्र संतान है। वह हमेशा थका हुआ स्वयं को अत्यन्त कमज़ोर महसूस करता, उसकी साँस भी बहुत जल्दी-जल्दी फूल जाती। इन सब कारणों से न वह पढ़ने लिखने में मन लगा पाता, न ही अन्य बच्चों की भाँति खेल - कूद कर पाता। इस कारण से उसका नाम स्कूल से काट दिया गया।


गोविन्द के माता-पिता गाँव के किसी डॉक्टर की सलाह पर उसे मथुरा के एक डॉक्टर के पास लाये, पर वे भी रोग का कारण न ज्ञात कर पाये। उन्होंने कुछ दवाईयाँ लिखीं पर कोई लाभ न हुआ। कुछ और महीने व्यतीत होने पर गोविंद की हालत और बिगड़ती गई।


पड़ौसियों से गोविंद के पिता को जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय, वृन्दावन के विषय में ज्ञात हुआ, जहाँ सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधायें निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। गोविंद के पिता बताते हैं कि चिकित्सालय में प्रवेश करते ही वहाँ के आध्यात्मिक वातावरण को देखकर उनके मन में आशा की किरण जाग उठी।


चिकित्सालय के एक डॉक्टर ने गोविंद का निरीक्षण किया। नीली पड़ी हुयीं त हाथ-पैरों की उँगलियों व निर्बल शरीर को देखकर उसके हृदय का परीक्षण किया गया, साथ ही अन्य आवश्यक जाँच की गयीं। जाँच के परिणाम चिंताजनक थे। हृदय को दो भागों में विभक्त करने वाला पर्दा (सेप्टम) जन्म से ही गोविंद के हृदय में नहीं था, इस कारण शुद्ध व अशुद्ध रक्त आपस में मिले रहे थे। इसी कारण शरीर दुर्बल व हाथ-पैरों की उँगलियाँ नीली पड़ गयी थीं। गोविंद के जीवन के बस कुछ ही माह शेष थे चिकित्सालय प्रशासन के निर्णय पर गोविंद को नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में विश्व विख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एन. एन. खन्ना को दिखाया गया। डॉ. खन्ना ने गोविंद की विस्तृत जाँच कर बताया कि इसका रोग जन्मजात व अत्यन्त जटिल है और किसी कार्डियो थोरैसिक सर्जन द्वारा इसके हृदय की शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) की तुरन्त आवश्यकता है। यद्यपि डॉ. खन्ना ने इस जाँच की कोई फीस नहीं ली लेकिन अपोलो अस्पताल ने ऑपरेशन का खर्च कई लाख रुपये बताया, जो गोविंद के माता-पिता के सम्पूर्ण जीवन की जमा पूँजी व सम्पत्ति से कई गुना अधिक था। निराश मन से गोविंद के माता-पिता वृन्दावन लौट आये व जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय के उस डॉक्टर को अपनी लाचारी से अवगत कराया। डॉक्टर ने जगद्गुरु कृपालु परिषत् की अध्यक्षाओं सुश्री डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी, सुश्री डॉ. श्यामा त्रिपाठी जी एवं सुश्री डॉ. कृष्णा त्रिपाठी जी से सम्पर्क किया। अध्यक्षाओं द्वारा ऑपरेशन का सम्पूर्ण खर्च वहन करने का निर्णय लिया गया। दिनांक 17 मार्च 2016 को अपोलो अस्पताल में गोविंद के हृदय का ऑपरेशन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।


जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज व जगद्गुरु कृपालु परिषत् की अध्यक्षाओं की अकारण दया पाकर गोविंद और उसके माता-पिता के नेत्र, कृतज्ञता के आसुँओं से भर गये। अब गोविंद नियमित रूप से अपनी जाँच कराने जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय आता है व स्वस्थ, प्रसन्नचित्त दिखाई पड़ता है। अब उसका विद्यालय में फिर से प्रवेश हो गया है तथा वह भी अन्य बच्चों की भाँति पढ़ता-लिखता व खेल-कूद करता है।


निष्कर्ष:

इस प्रकार गोविंद के माता-पिता के जीवन को प्रकाशित करने वाले गोविंद रूपी दिये को बुझने से बचाकर जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय ने अत्यन्त सराहनीय कार्य कर समाज के समक्ष आदर्श प्रस्तुत किया है। जगद्गुरु कृपालु परिषत् ने गोविंद के माता-पिता को जीवनकी एक नई दिशा दिलाई। जगद्गुरु कृपालु परिषत् ने गोविंद को जीवन का दूसरा मौका दिया , जिसका वह लायक है। सेवा, सहयोग, और करुणा की भावना से हम किसी के जीवन को सुधार सकते हैं। जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय ने गोविंद की जिंदगी को बदल दिया, और उसे विद्या, स्वास्थ्य, और समृद्धि की ओर अग्रसर किया।

जगद्गुरु कृपालु परिषत् और जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय, यह आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के दर्शन और मार्गदर्शन में स्थापित हुए हैं जिन्हे अब सुश्री डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी, सुश्री डॉ. श्यामा त्रिपाठी जी एवं सुश्री डॉ. कृष्णा त्रिपाठी के नेतृत्व में  चलाया जा रहा है । जगद्गुरु कृपालु चिकित्सालय द्वारा रोजमर्रा में कई लोगो का इलाज किया जाता है वही जगद्गुरु कृपालु परिषत् एक लाभ-निरपेक्ष, धर्मार्थ, शैक्षिक और आध्यात्मिक संगठन है, जो आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने और पूरे समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए समर्पित है। इन संगठनों का मिश्रण आध्यात्मिक संदेश के साथ सेवा प्रदान करने का एक अद्वितीय तरीका है, जो मानव समाज को दीर्घकालिक और समृद्ध तरीके से स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर करने का माध्यम बनता है। इन संगठनों का संयमित जीवन, आध्यात्मिक अध्ययन, और सेवाओं के माध्यम से व्यक्तिगत और सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान हो रहा है। इन दोनों संगठनों के बारे में अधिक जानने के लिए हमारे वेबसाइट को देखे 


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